उत्तराखंड
हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में गरजी छात्र ताकत; एस.आई.आर. प्रक्रिया के विरोध में आइसा व पछास ने फूंका मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला


हल्द्वानी / नैनीताल : उत्तराखंड के प्रमुख आर्थिक व शैक्षणिक केंद्र हल्द्वानी में आज राजनीतिक व सामाजिक सरगर्मी उस वक्त अपने चरम पर पहुँच गई, जब विभिन्न छात्र संगठनों और जनवादी समूहों ने सड़क पर उतरकर जोरदार हुंकार भरी। आज 10 अक्टूबर 2026 को छात्र संगठनों आइसा (AISA) और पछास की पहल पर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में एक विशाल संयुक्त सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया।
13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटने का गंभीर आरोप
बुद्ध पार्क में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोला। वक्ताओं ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक पूर्णतया असंवैधानिक प्रक्रिया के तहत एस.आई.आर. (SIR) को अंजाम दिया है। इस प्रक्रिया के जरिए देश भर में 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं।
वक्ताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि इस प्रकार की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के हनन के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त बेशर्मी से अपने पद पर बने हुए हैं। केंद्र सरकार केवल ज्ञानेश कुमार का बचाव ही नहीं कर रही, बल्कि जनता की हर न्यायपूर्ण आवाज को कुचलने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। देश की न्यायप्रिय जनता और छात्र-युवा इस तानाशाही को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
दिल्ली प्रदर्शनकारियों को रोकने पर फूटा गुस्सा, तानाशाही का आरोप
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने केंद्र और विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारों पर तीखे तंज कसे। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को बचाने और जनता के असंतोष को दबाने के लिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने आ रहे लोगों को जगह-जगह रोका गया। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया।
दिल्ली की ओर आने वाली ट्रेनों, बसों, यहाँ तक कि मेट्रो सेवाओं और एयरलाइंस तक को प्रभावित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह सारी कवायद इस बात का खुला प्रमाण है कि सरकार छात्रों और नौजवानों के सामने पूरी तरह घुटने टेक चुकी है। अब सरकार में इतनी हिम्मत नहीं बची है कि वह जनता के सामने आकर सच्चाई बयां कर सके।
एस.आई.आर. अपनाने वाले राज्यों के चुनाव रद्द करने की मांग
सभा के माध्यम से कड़े प्रस्ताव रखते हुए मांग की गई कि जिन-जिन राज्यों में एस.आई.आर. की प्रक्रिया अपनाकर चुनाव कराए गए हैं, उन सभी राज्यों के चुनाव तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाने चाहिए। वहाँ की चुनी हुई सरकारों को भंग कर फिर से साफ-सुथरे और पूरी तरह निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की मांग उठी।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने राजनीतिक फायदों के लिए देश की हर संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग कर रही है और सरेआम फासीवादी तानाशाही थोप रही है। हालांकि, तमाम पाबंदियों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्रों और नौजवानों का जंतर-मंतर पहुँचना इस आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता और सरकार के मुंह पर एक करारा तमाचा है।
प्रमुख वक्ताओं की उपस्थिति और संचालन
सभा का कुशल संचालन पछास के चंदन द्वारा किया गया। इस विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के प्रमुख नेताओं ने अपने विचार रखे, जिनमें शामिल हैं:
- आइसा: आकाश भारती, संदीप टम्टा, रिया आर्य
- पछास: अनुराग, मनवीर
- प्रमएके: रजनी
- भाकपा (माले): जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय, के.के. बोरा
- भीम आर्मी: नफीस अहमद
- क्रालोस: मुकेश भंडारी
इसके अलावा महेश, मीनाक्षी, नितिन, रोशनी, अमित, आदर्श, नीरज, दीपक, जीत Ram और मोहन समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अंत में संकल्प लिया कि नौजवान अब जाग चुके हैं और फासीवादी ताकतों के दिन अब लदने वाले हैं।

उत्तराखंड
नैनीताल जिले में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट; जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने 2 सितंबर को कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश किया घोषित

नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में मौसम का मिजाज एक बार फिर पूरी तरह बिगड़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी चेतावनी और जिलेभर में हो रही मूसलाधार बारिश के मद्देनजर जिला प्रशासन ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ललित मोहन रयाल ने 02 सितंबर 2026 (बुधवार) को जनपद के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है।
⚠️ मौसम विभाग का ‘Orange Alert’ और भूस्खलन का खतरा
निदेशक, भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा 1 सितंबर 2026 को जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, जनपद नैनीताल में 2 सितंबर को ‘Orange Alert’ जारी किया गया है। इसके तहत जनपद के पर्वतीय एवं मैदानी दोनों ही क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने, गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने तथा वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर चलने की प्रबल संभावना जताई गई है।
वर्तमान में जनपद के विभिन्न हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप नदियों, नालों और गधेरों में तेज जल प्रवाह देखने को मिल रहा है। इसके अलावा संवेदनशील स्थलों पर भू-स्खलन (Landslide) होने की आशंका भी बढ़ गई है, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटने का जोखिम बना हुआ है।
🏫 आदेश का दायरा और मुख्य बिंदु
बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा के दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- किसे बंद रखा जाएगा: जनपद नैनीताल के समस्त शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी विद्यालयों (कक्षा 01 से 12 तक संचालित समस्त शैक्षणिक संस्थाओं) तथा समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में 1 दिन का अवकाश रहेगा।
- स्टाफ के लिए निर्देश: विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण एवं समस्त कार्यालय स्टाफ हेतु भी यह अवकाश पूरी तरह अनुमन्य रहेगा।
- किसे छूट दी गई है: यह आदेश नैनीताल शहर क्षेत्र के अंतर्गत संचालित उन आवासीय शैक्षणिक संस्थाओं पर लागू नहीं होगा, जहाँ छात्र-छात्राओं के लिए शैक्षणिक और आवासीय सुविधाएं एक ही परिसर के भीतर उपलब्ध हैं।
👮♂️ सख्ती से पालन के निर्देश
जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षाधिकारी, नैनीताल और जिला कार्यक्रम अधिकारी, नैनीताल को कड़े शब्दों में निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ सभी शैक्षणिक संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों में इस आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराएं। यदि कोई संस्थान आदेश की अवहेलना करता पाया गया, तो विचलन की दशा में संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कड़ी विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रशासन ने आम जनमानस, अभिभावकों और पर्यटकों से भी अपील की है कि वे अत्यधिक आवश्यकता होने पर ही घरों से बाहर निकलें और उफनते नदी-नालों व संवेदनशील पर्वतीय मार्गों से दूरी बनाए रखें।

उत्तराखंड
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग; पदयात्रा बनी विशाल जनआंदोलन, खुरियाखत्ता में उमड़ी भारी भीड़, वनाधिकार कानून पर उठी आवाज

हल्द्वानी / बिंदुखत्ता: उत्तराखंड के बहुचर्चित क्षेत्र बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहा संघर्ष अब एक विकराल और व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से शुरू हुई यह पदयात्रा मंगलवार को खुरियाखत्ता नंबर 9 और 10 पहुँची, जहाँ बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं और जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।
🎶 जनगीतों के जोश के साथ आगे बढ़ी पदयात्रा
मंगलवार को खुरियाखत्ता पहुँची इस पदयात्रा के दौरान शामिल लोगों को ‘बिंदुखत्ता मांगे राजस्व ग्राम’ लिखी विशेष टी-शर्ट्स वितरित की गईं। इस दौरान वनाधिकार संगठन के कविराज धामी ने जोशपूर्ण जनगीत ‘ले मशालें चल पड़े हैं, लोग मेरे गांव के’ गाया, जिससे पदयात्रियों और स्थानीय जनता में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों को वनाधिकार कानून (FRA) से जुड़ी कानूनी बारीकियों और अधिकारों के बारे में विस्तार से समझाया गया।
📜 “बसासत 1932 से है, संस्तुति के जाल में न उलझाएं”
वनाधिकार संगठन की महिला उपाध्यक्ष ममता बिष्ट ने नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि FRA के तहत तीन पीढ़ियों या 75 वर्षों तक एक ही स्थान पर रहने की बात हर मामले में अनिवार्य शर्त नहीं है। उन्होंने कड़ा दावा किया कि बिंदुखत्ता की बसासत वर्ष 1932 से चली आ रही है और यहां के लोगों ने पीढ़ियों से वन क्षेत्र पर निर्भर रहकर अपना जीवन बिताया है।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि अब इस मामले को केवल ‘संस्तुति’ (Recommendation) जैसे प्रशासनिक और नौकरशाही के विषयों में उलझाने के बजाय सीधे कानून के अनुसार ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।
❓ सरकार से तीखा सवाल: “जब देश में 1,700 गांव बन सकते हैं, तो बिंदुखत्ता क्यों नहीं?”
वनाधिकार संगठन के उपाध्यक्ष दीपक जोशी ने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को मजबूती से दोहराते हुए कहा कि FRA के तहत प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अलग-अलग शर्तों के आधार पर रोकना इस अधिनियम की मूल भावना के पूरी तरह विपरीत है।
उन्होंने सरकार से तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि यदि देश के अलग-अलग हिस्सों में वनाधिकार कानून के तहत 1,700 से अधिक राजस्व ग्राम बनाए जा चुके हैं—जिनमें उत्तर प्रदेश में 54 और उत्तराखंड में 6 राजस्व ग्राम शामिल हैं—तो फिर बिंदुखत्ता को अब तक यह दर्जा क्यों नहीं दिया गया?
👥 भारी संख्या में महिलाओं और ग्रामीणों की भागीदारी
मंगलवार की इस पदयात्रा में आंदोलन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ, बलवंत बिष्ट, ममता बिष्ट, कविराज धामी, भरत नेगी, दीपक जोशी, सोहनलाल, सुशील यादव, दीपक नेगी, सूबेदार प्रेम सिंह, मंगल सिंह कोश्यारी और वीरेंद्र कार्की शामिल रहे।
इसके साथ ही आंदोलन में महिलाओं की भी ऐतिहासिक भागीदारी देखने को मिली। मंजू देवी, गंगा देवी, पार्वती देवी, दीपा देवी और कौशल्या देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं इस आयोजन में डटी रहीं।
आयोजकों के अनुसार, मंगलवार का कार्यक्रम टूटी पुलिया चौराहे पर एक विशाल सभा के बाद संपन्न हुआ। बुधवार को यह पदयात्रा शीशमभुजिया क्षेत्र की ओर रवाना होगी, और बिंदुखत्ता को उसका हक मिलने तक यह आंदोलन इसी प्रकार जारी रहेगा।

उत्तराखंड
लालकुआं में भीषण अग्निकांड: अंबेडकर नगर वार्ड एक में बंद मकान में संदिग्ध परिस्थितियों में लगी भयंकर आग, 5 लाख से अधिक की गृहस्थी जलकर स्वाहा

लालकुआं / नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के लालकुआं कोतवाली क्षेत्र से एक बड़ी और दिल दहला देने वाली दुर्घटना सामने आ रही है। क्षेत्र के अंबेडकर नगर वार्ड नंबर एक में बीती सोमवार रात एक बंद मकान में संदिग्ध परिस्थितियों में भीषण आग भड़क उठी। इस अग्निकांड की चपेट में आने से पीड़ित परिवार का सारा गृहस्थी का सामान जलकर पूरी तरह स्वाहा हो गया है। गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त परिवार घर पर मौजूद नहीं था, वरना एक बहुत बड़ी जनहानि हो सकती थी।
🏠 रक्षाबंधन मनाने दिल्ली गया था परिवार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंबेडकर नगर वार्ड नंबर एक निवासी राजेश उर्फ बल्ले का परिवार रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मनाने के लिए अपनी रिश्तेदारी में दिल्ली गया हुआ था। घर पर ताला लगा हुआ था। सोमवार रात अज्ञात कारणों के चलते उनके बंद मकान में अचानक आग धधक उठी।
देर रात जब उनके भाइयों ने मकान की खिड़कियों और छत से घना धुआं निकलते तथा तेज गर्मी से टाइल्स टूटते हुए देखी, तो उनके होश उड़ गए। इलाके में हड़कंप मच गया।
💧 भाइयों और स्थानीय लोगों की सूझबूझ से बुझी आग
मकान में धुआं और ऊंची लपटें देखकर भाई शम्भू और हरीश ने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों को अलर्ट किया। इसके बाद उन्होंने बिना एक पल गंवाए स्थानीय नागरिकों की मदद से पानी की व्यवस्था की और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया।
काफी मशक्कत और घंटों के कड़े संघर्ष के बाद किसी तरह आग को पूरी तरह से शांत किया जा सका, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आग इतनी भीषण थी कि घर के अंदर रखा सामान पूरी तरह जलकर कोयला बन चुका था।
💰 5 लाख से अधिक का नुकसान, परिवार सदमे में
इस भयंकर अग्निकांड में घर में रखा फ्रीज, कूलर, पंखे, कीमती कपड़े, बिस्तर, बर्तन और अन्य आवश्यक गृहस्थी का सामान पूरी तरह नष्ट हो गया है। पीड़ित परिवार के मुताबिक इस दुर्घटना में उनका लगभग 5 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
स्थानीय निवासियों ने घटना की तुरंत फोन के माध्यम से दिल्ली में मौजूद गृहस्वामी राजेश उर्फ बल्ले को सूचना दी। हादसे की खबर सुनते ही पीड़ित परिवार गहरे सदमे में आ गया, और मंगलवार सुबह जब वे किसी तरह अपने घर पहुंचे तो उनका रो-रोकर बुरा हाल था।
फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है, लेकिन इस अचानक हुई दुर्घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में गहरा दुख और चिंता का माहौल बना हुआ है।

अल्मोड़ा
अल्मोड़ा में भारी बारिश का कहर: पहाड़ी से गिरे मलबे ने ली तीन लोगों की जान

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मानसून का प्रकोप लगातार जारी है, और इसी बीच अल्मोड़ा जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। जिले के हवालबाग ब्लॉक क्षेत्र के उड़यूड़ा गांव में मंगलवार सुबह भारी मूसलाधार बारिश के बीच एक बड़ा प्राकृतिक हादसा हो गया। पहाड़ी से अचानक आए भारी मलबे की चपेट में एक रिहायशी मकान आ गया, जिससे घर के भीतर मौजूद तीन लोगों की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई है।
⛰️ पहाड़ी से आया भारी मलबा, मकान पर ढाया कहर
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से अल्मोड़ा समेत पूरे कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में लगातार भारी बारिश का दौर जारी है, जिससे पहाड़ों की मिट्टी ढीली हो चुकी है और भूस्खलन (Landslide) का खतरा चरम पर है।
मंगलवार की सुबह हवालबाग ब्लॉक के उड़यूड़ा गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लगातार बारिश के चलते पास की पहाड़ी से अचानक भारी मात्रा में मलबा नीचे आ गया। यह मलबा सीधे एक मकान पर जा गिरा। मलबा इतना अचानक और भीषण था कि मकान का बड़ा हिस्सा ढह गया और घर के अंदर सो रहे या मौजूद तीन लोग मलबे के नीचे दब गए।
🚨 SDRF और आपदा प्रबंधन टीम का तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन
इस भयंकर हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों में कोहराम मच गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें बिना किसी देरी के तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुईं।
राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर तुरंत मोर्चा संभाला और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे को हटाकर दबे हुए तीनों लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी— मलबे में दबने से तीनों की सांसें थम चुकी थीं। इस अकल्पनीय घटना से मृतका/मृतकों के परिजनों और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
⚠️ प्रशासन की सख्त चेतावनी और अपील
घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों के नागरिकों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है।
प्रशासन का कहना है कि वर्तमान में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और पहाड़ियों से मलबा आने का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। ऐसे में आम जनता से अपील की जाती है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें, अनावश्यक यात्राओं से बचें और किसी भी भूस्खलन संभावित या संवेदनशील स्थानों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

उत्तराखंड
उत्तराखंड में सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर: UKSSSC ने समूह-ग के तहत 553 पदों पर निकाली सीधी भर्ती, 8 सितंबर से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन

देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बेरोजगार युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी और खुशखबरी भरी अपडेट सामने आई है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने विभिन्न विभागों में समूह-ग के अंतर्गत कनिष्ठ सहायक, कंप्यूटर सहायक, निबंधन लिपिक, टेलीफोन ऑपरेटर और सर्वे लेखपाल समेत कुल 553 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है।
📅 महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)
इस भर्ती प्रक्रिया से जुड़े इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.sssc.uk.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। परीक्षा और आवेदन से जुड़ी मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:
- ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ होने की तिथि: 08 सितंबर 2026
- ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि: 07 अक्टूबर 2026
- आवेदन पत्र में संशोधन (Correction Window): 12 से 14 अक्टूबर 2026
- लिखित परीक्षा की प्रस्तावित तिथि: 15 नवंबर 2026
📚 शैक्षणिक योग्यता और पात्रता (Educational Qualification)
जारी विज्ञापन के अनुसार, अधिकांश पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास (इंटरमीडिएट) होना निर्धारित की गई है। इसके अलावा, जिन पदों पर लिपिकीय कार्य होना है, उनके लिए कंप्यूटर पर हिंदी टंकण में न्यूनतम 4000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा की गति होना अनिवार्य किया गया है।
👤 आयु सीमा और छूट (Age Limit)
अभ्यर्थियों की आयु की गणना 01 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। सामान्य पदों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 42 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।
📝 परीक्षा पैटर्न और नेगेटिव मार्किंग (Exam Pattern)
चयन प्रक्रिया के तहत 100 अंकों की दो घंटे की वस्तुनिष्ठ (Objective) ऑफलाइन लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम इस प्रकार रहेगा:
- सामान्य हिंदी: 20 अंक
- सामान्य ज्ञान एवं सामान्य अध्ययन: 40 अंक
- उत्तराखंड का सामान्य ज्ञान: 40 अंक
- विशेष नोट: परीक्षा में प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.25 अंक (1/4) की नेगेटिव मार्किंग होगी।
📋 प्रमुख पदों का विवरण (Post Breakdown)
इस भर्ती विज्ञापन में विभिन्न विभागों के अंतर्गत निम्नलिखित पद शामिल हैं:
- कनिष्ठ सहायक / कनिष्ठ सहायक सह डाटा एंट्री ऑपरेटर (विभिन्न विभाग व कलेक्ट्रेट): 06 पद
- निबंधन लिपिक: 55 पद
- सहायक खनिज पर्यवेक्षक: 22 पद
- सर्वे लेखपाल: 16 पद
- कंप्यूटर सहायक: 09 पद
- टेलीफोन ऑपरेटर (राज्यपाल सचिवालय): 01 पद
- (तथा अन्य शेष पद विभिन्न विभागों के अंतर्गत विज्ञापित किए गए हैं)
💰 आवेदन शुल्क (Application Fee)
वर्गवार निर्धारित आवेदन शुल्क का विवरण निम्नलिखित है:
- अनारक्षित व उत्तराखंड ओबीसी: 300 रुपये
- अनुसूचित जाति (SC): 150 रुपये
- अनुसूचित जनजाति (ST): 150 रुपये
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 150 रुपये
- दिव्यांग अभ्यर्थी: 150 रुपये
उत्तराखंड के युवाओं के लिए अपना भविष्य संवारने का यह एक सुनहरा अवसर है। अभ्यर्थी अंतिम तिथि से पहले आयोग की वेबसाइट पर जाकर समय से अपना ऑनलाइन आवेदन पत्र भर लें।

उत्तराखंड
‘वेस्ट हाईवे और बेकाबू रफ्तार का कहर!’ हल्दूचौड़ चौराहे पर हुए भीषण हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा, डंपर पुलिस के कब्जे में

हल्दूचौड़ / लालकुआं: उत्तराखंड के हल्दूचौड़ चौराहे पर रविवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली दर्दनाक सड़क दुर्घटना सामने आई है। सड़क पार कर रहे एक स्कूटी सवार युवक को तेज गति से आ रहे बेकाबू डंपर ने अपनी जोरदार चपेट में ले लिया, जिससे युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण हादसे के बाद चौराहे पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। घटना के बाद से क्षेत्र में शोक की लहर है और लोगों में यातायात सुरक्षा को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह हादसा रविवार दोपहर व्यस्त हल्दूचौड़ चौराहे पर हुआ। मृतक की पहचान कमल पांडे पुत्र पूरन पांडे, निवासी हिम्मतपुर चौमवाल, बेरीपड़ाव के रूप में बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि कमल पांडे अपनी स्कूटी से सड़क क्रॉस कर रहे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक तेज गति के डंपर ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भयानक था कि युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। दुर्घटना के बाद चालक वाहन समेत भागने की कोशिश में था, लेकिन सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई और दुर्घटना में शामिल डंपर को अपने कब्जे में ले लिया। हालांकि, हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और दुर्घटना के समय वाहन की गति कितनी थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
हल्दूचौड़ चौराहे पर हुए इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे और व्यस्त चौराहों की यातायात सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इस चौराहे पर दिनभर भारी भरकम व्यावसायिक वाहनों के साथ-साथ दोपहिया और अन्य स्थानीय वाहनों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के बीच से राहगीरों और दोपहिया चालकों के लिए सड़क पार करना लगातार जानलेवा साबित हो रहा है।
स्थानीय लोगों और आक्रोशित नागरिकों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कुछ दिनों तक जिम्मेदार विभाग और प्रशासन सक्रिय नजर आते हैं। चौराहों का निरीक्षण होता है, यातायात व्यवस्था सुधारने और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं।
लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने पुरजोर मांग रखी है कि हादसे के बाद केवल औपचारिकताएं और आश्वासन तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि दुर्घटना संभावित चौराहों पर स्पष्ट रोड मार्किंग, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग), प्रभावी संकेतक (साइनबोर्ड), गति नियंत्रण (स्पीड ब्रेकर) और सुरक्षित क्रॉसिंग की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कमल पांडे की अकाल मौत से हिम्मतपुर चौमवाल और बेरीपड़ाव क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे सड़क हादसे केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये कई हंसते-खेलते परिवारों की पूरी जिंदगी उजाड़ रहे हैं। प्रशासन को अब जागने की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को अपने किसी सदस्य को खोने का यह दर्द न झेलना पड़े।

उत्तराखंड
Crime & State News: बागेश्वर में दर्दनाक हादसा; गरुड़ तहसील के सिमार गांव में चारा काट रही महिला को जहरीले सांप ने डंसा, जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत, वन विभाग ने जारी की एडवाइजरी

बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक बेहद दुखद और दर्दनाक खबर सामने आ रही है। गरुड़ तहसील क्षेत्र के सिमार गांव में मवेशियों के लिए चारा काट रही एक 45 वर्षीय महिला को जहरीले सांप ने डंस लिया, जिससे इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद से मृतका के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे गांव में शोक की लहर है। इस बीच, वन विभाग ने बरसात के मौसम के मद्देनजर ग्रामीणों के लिए एक सख्त और आवश्यक एडवाइजरी जारी की है।
घास काटते वक्त पैर पर सांप ने डंसा
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह घटना गरुड़ तहसील के अंतर्गत आने वाले सिमार गांव की है। शनिवार देर शाम सिमार गांव निवासी 45 वर्षीय तुलसी देवी पत्नी राजेंद्र राम अपने घर के पास मवेशियों के लिए चारा काट रही थीं। इसी दौरान घास के बीच छिपे एक जहरीले सांप ने उनके बाएं पैर पर डंस लिया।
जैसे ही महिला को सांप के काटने का अहसास हुआ और उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, परिजन आनन्-फानन में उन्हें तुरंत सीएचसी बैजनाथ लेकर पहुंचे। अस्पताल के डॉक्टरों ने तुरंत उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया और उनकी जान बचाने के लिए एंटी स्नेक वेनम (Anti Snake Venom) का इंजेक्शन भी दिया।
रास्ते में तोड़ा दम, पुलिस और वन विभाग सक्रिय
सीएचसी बैजनाथ में प्राथमिक उपचार के बाद भी जब तुलसी देवी की हालत में सुधार नहीं हुआ और उनकी स्थिति बेहद गंभीर बनी रही, तो डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू सुविधा के लिए तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन उन्हें एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन दुर्भाग्यवश जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में महिला ने दम तोड़ दिया।
सर्पदंश से महिला की मौत की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वन विभाग ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी।
- पुलिस एक्शन: बैजनाथ/रामनगर क्षेत्र के कोतवाल अनिल उपाध्याय ने बताया कि जिला अस्पताल से सूचना मिलने के तुरंत बाद पुलिस टीम को मौके पर भेज दिया गया था, और मामले में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
- वन विभाग का मुआवजा: वन विभाग के प्रभारी एसडीओ एमएस गुसाईं ने बताया कि पूरा मामला संज्ञान में आ चुका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होते ही नियमानुसार मृतका के परिजनों को सरकारी राहत राशि (मुआवजा) प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
वन विभाग की विशेष एडवाइजरी: झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें
इस दुखद घटना के बाद वन विभाग ने बरसात के मौसम को लेकर एक विस्तृत चेतावनी और सलाह जारी की है। प्रभारी एसडीओ गुसाईं के अनुसार, बरसात के इन दिनों में भारी बारिश के कारण जमीन के नीचे बने सांप व अन्य जहरीले जीवों के बिलों में पानी भर जाता है, जिसके कारण वे बाहर निकलकर झाड़ियों और पत्थरों के आसपास शरण लेते हैं।
ग्रामीणों और किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने निम्नलिखित सावधानियां बरतने की अपील की है:
- सुरक्षात्मक गियर: मवेशियों के लिए चारा काटते या खेतों में काम करते समय पैरों में मजबूत जूते और हाथों में दस्ताने अवश्य पहनें।
- लाठी और टॉर्च का प्रयोग: घनी झाड़ियों या अंधेरी जगहों पर जाने से पहले लाठी से झाड़ियों को खटखटाएं और रात के समय हमेशा टॉर्च का उपयोग करें।
- घर के आसपास सफाई: अपने घरों और गोशाला के आसपास घास और झाड़ियों को उगने न दें तथा नियमित रूप से साफ-सफाई बनाए रखें।
- झाड़-फूंक से बचें: सर्पदंश (सांप के काटने) की स्थिति में अंधविश्वास या झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय बिल्कुल न गंवाएं। बिना देर किए तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम का इंजेक्शन लगवाएं।

उत्तराखंड
FIR Against Rahul Gandhi Under SC/ST Act and BNS


हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में रामलीला मैदान के कथित शुद्धिकरण के विवाद से राजनीतिक घमासान शुरू हुआ. Moreover, इस मामले में पुलिस ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के against एफआईआर दर्ज कर ली है. राहुल गांधी पर FIR दर्ज! हल्द्वानी रामलीला मैदान विवाद, SC/ST Act के तहत मुकदमा.
🏛️ खड़गे की सभा और शुद्धिकरण कार्यक्रम से उपजा था विवाद
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा से जुड़ा हुआ है। खड़गे की सभा के बाद मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण कार्यक्रम’ को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में लंबी और तीखी बयानबाजी का दौर चला था, जिसने दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा दिया था।
इसी बीच, विनोद आर्य और अमित कुमार की ओर से स्थानीय पुलिस को एक औपचारिक तहरीर दी गई।
दी गई तहरीर में आरोप है कि राहुल गांधी के बयानों में जातिसूचक शब्द थे, जिससे भावनाएं ठेस पहुंचीं।
राहुल गांधी पर FIR दर्ज! हल्द्वानी रामलीला मैदान विवाद, SC/ST Act के तहत मुकदमा
⚖️ एससी/एसटी एक्ट और बीएनएस की इन धाराओं में हुआ केस दर्ज
पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह मशविरा किया। अमित कुमार की तहरीर के आधार पर पुलिस ने एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज कर ली है।
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने निम्नलिखित गंभीर धाराएं लगाई हैं:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना आदि)
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किया गया दुर्भावनापूर्ण कृत्य)
- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(q)
🔍 पुलिस की विवेचना पर टिकी निगाहें
एफआईआर दर्ज होने के बाद रामलीला मैदान शुद्धिकरण विवाद ने एक नया और बड़ा राजनीतिक तथा कानूनी मोड़ ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे के बाद से राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी और तेज हो गई है।
हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
लेकिन वास्तविक स्थिति पुलिस विवेचना (Investigation) और साक्ष्यों की गहन पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल पुलिस की आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
इस मामले में होने वाली विवेचना पर भी सभी की निगाहें बनी हैं।

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