उत्तराखंड
हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में गरजी छात्र ताकत; एस.आई.आर. प्रक्रिया के विरोध में आइसा व पछास ने फूंका मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला

हल्द्वानी / नैनीताल : उत्तराखंड के प्रमुख आर्थिक व शैक्षणिक केंद्र हल्द्वानी में आज राजनीतिक व सामाजिक सरगर्मी उस वक्त अपने चरम पर पहुँच गई, जब विभिन्न छात्र संगठनों और जनवादी समूहों ने सड़क पर उतरकर जोरदार हुंकार भरी। आज 10 अक्टूबर 2026 को छात्र संगठनों आइसा (AISA) और पछास की पहल पर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में एक विशाल संयुक्त सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया।
13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटने का गंभीर आरोप
बुद्ध पार्क में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोला। वक्ताओं ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक पूर्णतया असंवैधानिक प्रक्रिया के तहत एस.आई.आर. (SIR) को अंजाम दिया है। इस प्रक्रिया के जरिए देश भर में 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं।
वक्ताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि इस प्रकार की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के हनन के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त बेशर्मी से अपने पद पर बने हुए हैं। केंद्र सरकार केवल ज्ञानेश कुमार का बचाव ही नहीं कर रही, बल्कि जनता की हर न्यायपूर्ण आवाज को कुचलने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। देश की न्यायप्रिय जनता और छात्र-युवा इस तानाशाही को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
दिल्ली प्रदर्शनकारियों को रोकने पर फूटा गुस्सा, तानाशाही का आरोप
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने केंद्र और विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारों पर तीखे तंज कसे। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को बचाने और जनता के असंतोष को दबाने के लिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने आ रहे लोगों को जगह-जगह रोका गया। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया।
दिल्ली की ओर आने वाली ट्रेनों, बसों, यहाँ तक कि मेट्रो सेवाओं और एयरलाइंस तक को प्रभावित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह सारी कवायद इस बात का खुला प्रमाण है कि सरकार छात्रों और नौजवानों के सामने पूरी तरह घुटने टेक चुकी है। अब सरकार में इतनी हिम्मत नहीं बची है कि वह जनता के सामने आकर सच्चाई बयां कर सके।
एस.आई.आर. अपनाने वाले राज्यों के चुनाव रद्द करने की मांग
सभा के माध्यम से कड़े प्रस्ताव रखते हुए मांग की गई कि जिन-जिन राज्यों में एस.आई.आर. की प्रक्रिया अपनाकर चुनाव कराए गए हैं, उन सभी राज्यों के चुनाव तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाने चाहिए। वहाँ की चुनी हुई सरकारों को भंग कर फिर से साफ-सुथरे और पूरी तरह निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की मांग उठी।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने राजनीतिक फायदों के लिए देश की हर संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग कर रही है और सरेआम फासीवादी तानाशाही थोप रही है। हालांकि, तमाम पाबंदियों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्रों और नौजवानों का जंतर-मंतर पहुँचना इस आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता और सरकार के मुंह पर एक करारा तमाचा है।
प्रमुख वक्ताओं की उपस्थिति और संचालन
सभा का कुशल संचालन पछास के चंदन द्वारा किया गया। इस विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के प्रमुख नेताओं ने अपने विचार रखे, जिनमें शामिल हैं:
- आइसा: आकाश भारती, संदीप टम्टा, रिया आर्य
- पछास: अनुराग, मनवीर
- प्रमएके: रजनी
- भाकपा (माले): जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय, के.के. बोरा
- भीम आर्मी: नफीस अहमद
- क्रालोस: मुकेश भंडारी
इसके अलावा महेश, मीनाक्षी, नितिन, रोशनी, अमित, आदर्श, नीरज, दीपक, जीत Ram और मोहन समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अंत में संकल्प लिया कि नौजवान अब जाग चुके हैं और फासीवादी ताकतों के दिन अब लदने वाले हैं।