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जन-धन योजना के 12 साल पूरे: ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा जमा, 59 करोड़ बैंक खातों के साथ भारत में वित्तीय समावेशन की ऐतिहासिक क्रांति
नई दिल्ली: बारह वर्ष पूर्व जब देश के प्रत्येक नागरिक को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के दूरदर्शी संकल्प के साथ प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) की शुरुआत की गई थी, तब इसका उद्देश्य सीधा लेकिन अत्यंत क्रांतिकारी था— वित्तीय अस्पृश्यता को समाप्त कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग पहुंचाना। आज इस ऐतिहासिक यात्रा के 12 वर्ष पूरे होने पर यह योजना न केवल अपनी विशाल संख्यात्मक सफलता के लिए जानी जा रही है, बल्कि इसने भारत में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) की पूरी परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है।
📊 59 करोड़ खाते और ₹3 लाख करोड़ से अधिक की जमा पूंजी
योजना के 12 वर्षों के सफर के दौरान देश में अब तक लगभग 59 करोड़ जन-धन खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में कुल जमा राशि ₹3 लाख करोड़ (Three Lakh Crore Rupees) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि देश के निम्न और मध्यम आय वर्ग के नागरिकों ने औपचारिक वित्तीय तंत्र पर अटूट विश्वास जताया है।
👩💼 50% से अधिक महिला लाभार्थी, 80% खाते ग्रामीण भारत में
जन-धन योजना की सबसे विशिष्ट और प्रेरक उपलब्धि महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों की अभूतपूर्व भागीदारी रही है:
- महिला सशक्तिकरण: कुल लाभार्थियों में से आधे से अधिक (50%+) महिलाएं हैं, जिनके पास अब अपने स्वतंत्र बैंक खाते हैं।
- ग्रामीण विस्तार: लगभग हर पांच में से चार खाते यानी 80 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी बैंक शाखाओं में खोले गए हैं।
- सरकारी बैंकों की भूमिका: इस पूरे राष्ट्रीय अभियान में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अग्रणी भूमिका निभाई है, जिनकी जन-धन खातों में लगभग 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अकेले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पास करीब 16 करोड़ पीएमजेडीवाई खाते संचालित हो रहे हैं।
📈 ‘जीरो-बैलेंस’ से ₹5,000 की औसत जमा तक का सफर
शुरुआती दौर में जन-धन खातों को अक्सर ‘जीरो-बैलेंस’ खातों के रूप में देखा जाता था। लेकिन समय बीतने के साथ खाताधारकों के वित्तीय व्यवहार में गहरा सकारात्मक बदलाव आया है। आज इन खातों में औसत जमा राशि ₹5,000 को पार कर चुकी है। यह बदलाव स्पष्ट करता है कि लोग अब केवल औपचारिक बैंकिंग से जुड़ ही नहीं रहे हैं, बल्कि वे बचत करने, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के रूप में आय प्राप्त करने, डिजिटल भुगतान करने और अपनी वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इन खातों का नियमित उपयोग कर रहे हैं।
🛡️ बैंक खाते से आगे: बीमा, पेंशन और मुद्रा लोन का मजबूत इकोसिस्टम
जन-धन योजना का पहला चरण देश के हर नागरिक तक बैंकिंग की ‘पहुंच’ सुनिश्चित करने का था। अब यह पहुंच अधिक सार्थक और बहुआयामी इकोसिस्टम में तब्दील हो चुकी है:
- सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: जन-धन खातों के माध्यम से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसे सरल बीमा और पेंशन उत्पाद जन-जन तक पहुंचे हैं।
- समावेशी ऋण: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और पीएम स्वनिधि जैसी पहलों के जरिए रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे उद्यमियों को आसान संस्थागत ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
- स्वयं सहायता समूह तंत्र: आज देश भर में महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) नेटवर्क 10 करोड़ से अधिक महिलाओं तक पहुंच चुका है, जिसमें एसबीआई अकेले 10 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों को निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है।
भारत के तेजी से विकसित होते डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढांचे (UPI व डिजिटल पेमेंट्स) के बल पर अब अगली प्राथमिकता उन आर्थिक रूप से सक्रिय लोगों का मूल्यांकन करना और उन्हें किफायती, सुगम एवं पारदर्शी वित्तीय उत्पाद उपलब्ध कराना है, जो औपचारिक बैंकिंग की मुख्यधारा में नए आयाम जोड़ेंगे।
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